
सिंगाजी की दो बहनों ने केनाइंग में मचाई धूम, कावेरी ने जीते 3 गोल्ड तो दीपिका ने 2 सिल्वर समेत 3 पदक।

कभी परिवार के लिए छोटी नाव से मछली पकड़ती थीं, अब राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ा रहीं जिले का मान; कावेरी के नाम 50 से अधिक राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पदक।
खंडवा। जिले के सिंगाजी क्षेत्र की दो बहनों ने खेल की दुनिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। परिवार की मदद के लिए छोटी नाव से मछली पकड़ने का काम करने वाली कावेरी डिमर और उनकी छोटी बहन दीपिका डिमर आज केनाइंग खेल में राष्ट्रीय स्तर पर लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही हैं। समाज सेवी व प्रवक्ता सुनील जैन ने सिंगाजी की कावेरी और दीपिका को उपलब्धि पर बधाई देते हुए बताया कि भोपाल के लोअर लेक में आयोजित अश्मिता नेशनल प्रतियोगिता में दोनों बहनों ने कुल 6 पदक जीतकर ग्राम सिंगाजी के साथ जिले एवं प्रदेश का नाम रोशन किया।
सीनियर वर्ग में खेल रहीं कावेरी डिमर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं की सी-2 1000 मीटर, सी-4 1000 मीटर और सी-4 500 मीटर स्पर्धा में तीन स्वर्ण पदक अपने नाम किए। वहीं जूनियर वर्ग में दीपिका डिमर ने सी-1 महिला 500 मीटर में कांस्य, सी-1 महिला 200 मीटर और सी-4 महिला 200 मीटर में दो रजत पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।
50 से अधिक पदक जीत चुकीं कावेरी
समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि कावेरी डिमर का खेल सफर संघर्ष और उपलब्धियों से भरा रहा है। अब तक वह 50 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पदक जीत चुकी हैं। इनमें स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक शामिल हैं। छोटी बहन दीपिका भी अपनी बड़ी बहन के नक्शेकदम पर चलते हुए लगातार पदक जीत रही हैं। वह अब तक 20 से अधिक पदक अपने नाम कर चुकी हैं।
छोटी नाव से शुरू हुआ सफर, अब राष्ट्रीय पहचान
दोनों बहनों का जीवन संघर्ष से जुड़ा रहा है। परिवार की आजीविका में सहयोग के लिए वे छोटी नाव से मछली पकड़ने का काम भी करती रही हैं। इसी नाव और पानी से जुड़ाव ने आगे चलकर उन्हें केनाइंग जैसे खेल की ओर बढ़ने का अवसर दिया। मेहनत, लगन और लगातार अभ्यास के दम पर दोनों बहनों ने खेल की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। प्रवक्ता सुनील जैन ने बताया कि कावेरी और दीपिका की उपलब्धियां न सिर्फ उनके परिवार बल्कि सिंगाजी क्षेत्र और पूरे खंडवा जिले के लिए गौरव की बात हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद दोनों बहनों का राष्ट्रीय स्तर पर लगातार पदक जीतना यह साबित करता है कि प्रतिभा को यदि मेहनत और सही अवसर मिले तो वह किसी भी परिस्थिति में अपनी पहचान बना सकती है।







